राजस्व अभिलेखों से API के माध्यम से होगा गन्ना क्षेत्रफल का सत्यापन,कृषक बधुओं को मिलेगी पारदर्शी एवं त्रुटिरहित व्यवस्था
बलरामपुर 27 जुलाई 2026। प्रदेश सरकार की मंशा के अनुरूप गन्ना सर्वेक्षण एवं सट्टा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, तकनीक आधारित तथा कृषक हितैषी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। इसी क्रम में स्मार्ट गन्ना किसान (एस.जी.के.) पोर्टल पर उपलब्ध गन्ना क्षेत्रफल का भू-राजस्व अभिलेखों से API (Application Programming Interface) के माध्यम से सत्यापन कराया जाएगा, जिससे गन्ना क्षेत्रफल संबंधी आंकड़ों की शुद्धता सुनिश्चित हो सके तथा फर्जी एवं त्रुटिपूर्ण प्रविष्टियों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
इसी उद्देश्य से 25 जुलाई 2026 को न्यू स्कॉलर्स हॉस्टल सभागार, लखनऊ में अयोध्या, देवीपाटन, गोरखपुर एवं देवरिया परिक्षेत्र के अधिकारियों एवं फील्ड कार्मिकों के लिए स्मार्ट गन्ना किसान पोर्टल पर उपलब्ध गन्ना क्षेत्रफल के डेटा के भू-राजस्व अभिलेखों से मैपिंग एवं सत्यापन संबंधी वर्चुअल प्रशिक्षण आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में डेटा सत्यापन की प्रक्रिया, तकनीकी पहलुओं, मैपिंग प्रणाली तथा निर्धारित समय-सीमा के भीतर पारदर्शी ढंग से सत्यापन कार्य पूर्ण करने के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई।
जिला गन्ना अधिकारी बलरामपुर संजय कुमार ने बताया कि प्रथम चरण में एक हेक्टेयर से अधिक गन्ना क्षेत्रफल वाले कृषकों के आंकड़ों का सत्यापन किया जाएगा। इसके उपरांत चरणबद्ध तरीके से अन्य गन्ना कृषकों के क्षेत्रफल का भी सत्यापन किया जाएगा। इस व्यवस्था से केवल वास्तविक एवं पात्र किसानों का गन्ना क्षेत्रफल ही स्मार्ट गन्ना किसान पोर्टल पर प्रदर्शित होगा, जिससे गन्ना आपूर्ति, सर्वेक्षण, सट्टा निर्धारण एवं भुगतान व्यवस्था अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनेगी। उन्होंने बताया कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य स्मार्ट गन्ना किसान पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों में शुद्धता एवं पारदर्शिता लाना, फर्जी एवं त्रुटिपूर्ण डेटा का पूर्णतः उन्मूलन करना तथा आधुनिक तकनीक के माध्यम से किसानों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराना है। इससे गन्ना क्षेत्रफल से संबंधित विवादों में कमी आएगी तथा वास्तविक किसानों के हितों की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
जिला गन्ना अधिकारी ने बताया कि अभियान के अंतर्गत किसानों को उनके गन्ना सर्वे एवं सट्टा से संबंधित 63 महत्वपूर्ण बिंदुओं की विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। यदि किसी किसान को सर्वेक्षण अथवा सट्टा से संबंधित कोई शिकायत या आपत्ति होगी, तो उसका मौके पर ही त्वरित एवं पारदर्शी निस्तारण सुनिश्चित किया जाएगा, जिससे किसानों को अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
उन्होंने कहा कि इस अभियान को सफल बनाने के लिए सहकारी गन्ना विकास समितियों के अध्यक्षों एवं जनप्रतिनिधियों का भी सहयोग लिया जाएगा। विभाग का विश्वास है कि भू-राजस्व अभिलेखों एवं स्मार्ट गन्ना किसान पोर्टल के आंकड़ों के तकनीकी समन्वय से प्रदेश की गन्ना सर्वेक्षण प्रणाली और अधिक सुदृढ़, पारदर्शी एवं किसान हितैषी बनेगी तथा गन्ना विकास की प्रक्रिया को नई गति मिलेगी।
