शीतलहर को लेकर जिला प्रशासन ने जारी की विस्तृत एडवाइजरी
बलरामपुर 17दिसम्बर। अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) ज्योति राय ने बताया है कि जनपद में वर्तमान में शीतलहर को देखते हुए आमजन को ठंड एवं उससे उत्पन्न होने वाली समस्याओं से बचाव हेतु जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा विस्तृत एडवाइजरी जारी की गई है। उन्होंने कहा कि शीतलहर संबंधी मौसम पूर्वानुमान एवं आपातकालीन दिशा-निर्देशों का बारीकी से पालन करना अत्यंत आवश्यक है।
एडीएम राय ने आमजन से अपील की है कि यथासंभव घर के अंदर रहें, अनावश्यक यात्रा से बचें तथा ठंडी हवा के सीधे संपर्क में न आएं। उन्होंने बताया कि ढीले फिटिंग, हल्के एवं विंडप्रूफ ऊनी कपड़ों की कई परतें पहनें, क्योंकि टाइट कपड़े रक्त संचार को बाधित करते हैं। शरीर को सूखा रखें तथा सिर, गर्दन, हाथों और पैरों को अच्छी तरह ढककर रखें। दस्ताने, टोपी एवं मफलर का उपयोग अवश्य करें।
उन्होंने बताया कि शरीर के तापमान को संतुलित रखने के लिए विटामिन-सी युक्त फल-सब्जियों का सेवन करें तथा नियमित रूप से गर्म तरल पदार्थ पिएं। त्वचा को सूखने से बचाने के लिए तेल, पेट्रोलियम जेली अथवा बॉडी क्रीम का प्रयोग करें। बुजुर्गों, बच्चों एवं अकेले रहने वाले व्यक्तियों की विशेष देखभाल करें। शीतलहर के प्रभाव से हाथ-पैर की उंगलियों, कान एवं नाक की नोक पर सुन्नता या सफेद/पीला पड़ना दिखाई देना गंभीर लक्षण हैं, ऐसे में तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें। कंपकंपी को नजरअंदाज न करें, यह शरीर के अत्यधिक ठंडा होने का संकेत है।
उन्होंने हाइपोथर्मिया को एक आपातकालीन स्थिति बताते हुए कहा कि इसके लक्षणों में अत्यधिक कंपकंपी, बोलने में कठिनाई, मांसपेशियों में अकड़न, कमजोरी, सांस लेने में परेशानी एवं चेतना का नुकसान शामिल है। ऐसे मामलों में व्यक्ति को तुरंत गर्म स्थान पर ले जाएं, गीले कपड़े बदलें, कंबल या कपड़ों की परतों से ढकें और स्थिति गंभीर होने पर तत्काल चिकित्सीय सहायता लें। बंद कमरे में कोयला या अंगीठी जलाने से बचें, क्योंकि इससे कार्बन मोनोऑक्साइड गैस उत्पन्न होकर जानलेवा हो सकती है।
कृषि के लिए सलाह-
एडीएम ने बताया कि शीतलहर एवं पाला फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं। इससे पत्तियों के झुलसने, रोगों के प्रकोप, अंकुरण एवं उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। किसानों को सलाह दी गई है कि बोर्डाे मिश्रण या कॉपर ऑक्सीक्लोराइड, फास्फोरस एवं पोटाश का छिड़काव करें। हल्की एवं बार-बार सिंचाई, स्प्रिंकलर का प्रयोग, ठंड प्रतिरोधी किस्मों की खेती, इंटरक्रॉपिंग, जैविक मल्चिंग एवं विंड ब्रेक शेल्टर बेल्ट का उपयोग करें। युवा पौधों को प्लास्टिक या पुआल से ढककर सुरक्षित रखें।
*पशुपालन के लिए दिशा-निर्देश-
शीतलहर के दौरान पशुओं को अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है। पशुओं को ठंडी हवा के सीधे संपर्क से बचाएं, आश्रयों को ढककर रखें, गर्म बिछावन एवं पर्याप्त आहार उपलब्ध कराएं। उच्च गुणवत्ता वाले चारे, वसायुक्त खुराक तथा स्वच्छ पानी की व्यवस्था करें। पशुओं को खुले में न बांधें, ठंडा चारा एवं पानी न दें तथा पशु मेलों से बचें।
